शिवलिंग पर जल चढ़ाने का सही तरीका क्या है?

शिवलिंग जलाभिषेक विधि – सावन का महीना शुरू हो गया है और आज सावन का पहला सोमवार है। महादेव के के भक्त उन्हें प्रसन्न करने के लिए उनका अभिषेक करते हैं. अधिकतर भक्त उन्हें पंचामृत, दूध या जल का अभिषेक करते हैं. लेकिन शायद ही आपको पता होगा कि भगवान भोलेनाथ को जल चढ़ाने के कुछ नियम भी हैं। अगर इस नियम के अनुसार भोलेनाथ का अभिषेक किया जाता है, तो भगवान भोलेनाथ भक्तों पर विशेष कृपा करते हैं। तो चलिए जानते हैं शिवजी को जलाभिषेक करने के नियम क्या है। शिवलिंग पर जल कैसे चढ़ाए?

शिवलिंग पर जल कैसे चढ़ाए?
शिवलिंग पर जल कैसे चढ़ाए?

शिवजी के जलाभिषेक करने के लिए कौनसे पात्र का इस्तेमाल करना चाहिए 

जिस तरह पूजा के लिए जल की पवित्रता जरूरी है ठीक वैसे ही पूजा की पवित्रता भी बेहद आवश्यक है। मतलब शिवजी को जल चढ़ाते या अभिषेक करते समय यह ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है कि किस तरह 1 के कलश से उन्हें जल चढ़ाया जाता है।

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बता दे कि शिवाभिषेक के लिए तांबे का पात्र (बर्तन) सबसे अच्छा माना जाता है। कांसे या चांदी के पात्र से अभिषेक करना भी शुभ माना जाता है। लेकिन गलती से भी शिव जी का किसी स्टील के बर्तन से अभिषेक नहीं करना चाहिए। ऐसे ही ही तांबे के बर्तन से दूध का अभिषेक करना भी अशुभ माना जाता है।

सही दिशा का है खास महत्व..
भोलेनाथ को जल चढ़ाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चहिये की, कभी भी पूर्व दिशा की तरफ मुंह करके शिवजी को जल न चढ़ाएं। पूर्व दिशा को भगवान शिव का मुख्य प्रवेश द्वार माना जाता है। माना जाता है कि इस दिशा में मुख करने से शिवजी के द्वार में बाधा उत्पन्न होती है और वह रुष्ट भी हो सकते हैं। और यही वजह है कि हमेशा उत्तर दिशा की ओर मुंह करके शिवजी को जल अर्पित करना चाहिए। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस दिशा की ओर मुख करके जल अर्पित करने से शिव और पार्वती दोनों को आशीर्वाद मिलता है।

इसके अलावा भोलेनाथ का जलाभिषेक करते समय शांत मन से धीरे धीरे उन्हें जल चढ़ाना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि जब हम धीमी धार से महादेव का अभिषेक करते हैं तो महादेव विशेष रूप से प्रसन्न होते हैं। बता दे कि शिवजी को भूल से ज्यादा तेज या बड़ी धारा में जल नहीं अर्पित नही करना चाहिए।

जल अभिषेक करने का आसन..
जब भी शिवलिंग पर जल चढ़ाये तो हमेशा बैठकर शांत मन से जल चढ़ाएं। इसके अलावा रुद्राभिषेक करते समय कभी भी खड़े नहीं होना चाहिए, क्योंकि मान्यता है कि खड़े होकर शिवजी को जल चढ़ाने से इसका पुण्य फल भी नहीं मिलता है।

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