प्रबंध क्या है व इसके प्रमुख कार्य क्या है?

प्रबंध क्या है व इसके प्रमुख कार्य क्या है? – प्रबन्ध एक ऐसी प्रतिभा है जो अपने लक्ष्यों व उदेश्यों की प्राप्ति के लिए समस्त आवश्यक कार्य को एक विधिवत किया जाता है जिससे कम समय में अपने लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके ।
जब भी कोई व्यक्ति अपना व्यवसाय आरंभ करता है तो सर्वप्रथम वह अपने व्यवसाय को सुचारू रूप से चलाने के लिए जिस प्रक्रिया का अध्ययन करता है वह प्रबंध कहलाती है इसके अंतर्गत वह अपने व्यवसाय को लाभ प्राप्ति के लिए रख विशेष प्रक्रिया का अनुसरण करता है जिसे प्रबंध के कार्य कहते है ।

प्रबंध क्या है व इसके प्रमुख कार्य क्या है?
प्रबंध क्या है व इसके प्रमुख कार्य क्या है?

लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए जिस प्रक्रिया का अनुसरण किया जाता है वह प्रबंध कहलाता है तथा जो व्यक्ति इस प्रक्रिया या प्रबन्ध प्रक्रिया को अपने व्यवसाय या कार्य मे लाभ प्राप्ति के लिए अपनाता है वय प्रबंधक कहलाता है ।

प्रबंध के कार्य
प्रबन्ध के सामान्यतः 2 प्रकार के कार्य होते हैं।
1 प्रमुख कार्य , 2 सहायक कार्य

(a) प्रमुख कार्य
प्रबंध करते समय ऐसे कार्य जो प्रबन्ध करते समय या किसी व्यवसाय को शुरू करते समय किये जाते हैं प्रमुख कार्य कहलाते हैं ।

(1) नियोजन – नियोजन से तात्पर्य है भविष्य के गर्भ में झांकना । अर्थात किसी भी ऐसे कार्य को करते समय जिससे कोई प्रतिफल प्राप्ति होती है वह नियोजन के अंतर्गत सम्मिलित होती है । नियोजन के माध्यम से भविष्य में होने वाली अनिश्चितताओं को दूर किया जा सके । नियोजन के माध्यम से किसी भी व्यवसाय में होने वाली लाभ हानि का अनुमान लगाकर उस व्यापार की प्रतिभा का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है ।

( 2 ) नियुक्तिकरण – नियोजन के पश्चात प्रबन्ध का प्रमुख कार्य है नियुक्तिकरण । अर्थात नियोजन में भविष्य की अनिश्चितता का पता लगाया जाता है तथा उसके पश्चात नियुक्तिकरण के अंतर्गत योग्य कर्मचारी या कार्य के लिए लोगो की नियुक्ति करना होता है यह कार्य सभी स्तर के प्रबंधकर्ता के माध्यम से किया जाता है चाहे वह किसी भी प्रकार का व्यवसाय या प्रबन्ध हो।

( 3 ) नियंत्रण – नियंत्रण के अंतर्गत समस्त कार्य करते हुए कर्मचारियों के मध्य कार्य करते हुए अपने नियंत्रण में रखना जिससे यह ज्ञात हो सके की कार्य उचित समय पर पूरा हो रहा है या नही । नियंत्रण का तात्पर्य यह है कि किसी भी व्यवसाय में जब लाभ कमाना प्रमुख उद्देश्य हो उसमे कार्य करते कर्मचारियों की कार्यकुशलता का मापन करना तथा अपने व्यवसाय की कार्यक्षमता को देखना नियंत्रण कहलाता है ।

( 4 ) निर्देशन – प्रबन्ध अथवा व्यवसाय में कार्य कर रहे समस्त कर्मचारियों एवं व्यक्ति को उनके कार्य से अवगत कराना , कार्य की प्रकृति बताना, व्यवसाय के बारे में बताना आदि समस्त ऐसी बातों का बोध कराना जिससे प्रबन्ध या व्यवसाय को लाभ प्राप्त हो सके वह वह निर्देशन के अंतर्गत सम्मिलित है ।
यह कर्मचारियों से कार्य कराने की वह दूसरी कला है जिससे व्यक्ति अपने व्यवसाय के माध्यम से अधिक से अधिक लाभ कमाने के लिये उपयोग में लाता है ।

( 5 ) समन्वयन – प्रबंध में कार्यरत समस्त कर्मचारियों के मध्य आपस मे एक दूसरे के प्रति समन्यवय स्थापित करना प्रबन्ध का महत्वपूर्ण कार्य होता है इसके माध्यम से समस्त कर्मचारियों में मैत्री की भावना का विकास होता है जिससे वह सभी मिलकर कार्य को करते है तथा व्यवसाय के विकास में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करते हैं। समन्वयन व्यवसाय के विकास की वह कुंजी है जिसे केवल प्रबन्धक ही अपने पास रखता है

( 6 ) अभिप्रेरण – अभिप्रेरण से तात्पर्य ऐसे कार्य से है जिसके कारण प्रत्येक उधमी व्यवसायी प्रबन्धक अपना कार्य आसानी से सम्पन्न करते है । अर्थात किसी प्रबन्ध के कर्मचारी को समय समय पर उसके कार्य के प्रति अभिप्रेरित करके ज्यादा से ज्यादा काम आसानी से कराया जा सकता है , जिस प्रंबध या व्यवसाय में अभिप्रेरणा की मात्रा अधिक होती है वह व्यवसाय विकास की ओर आसानी से बढ़ता है

प्रबन्ध के सहायक कार्य

( 1 ) निर्णयन – यह प्रबन्ध का सहायक प्रमुख कार्य है जिसकी आवयश्कता प्रत्येक उपक्रम में होती है इसके अंतर्गत प्रत्येक व्यवसायी व प्रबन्धक अपने कार्य के प्रति समय समय पर निर्णय लेना जो व्यवसाय की कार्य को प्रोत्साहन देने का कार्य करते हैं तथा व्यवसायिक निर्णय लेना आदि निर्णयन कार्य होता है।

( 2 ) सम्प्रेषण – सम्प्रेषण से तात्पर्य ऐसे कार्य से है जो दो व्यक्ति के मध्य समय समय पर अपनी व्यवसाय के आदेश निर्देशो का आदान प्रदान करते हैं या आपस मे वार्तालाप करते है उक्त प्रक्रिया सम्प्रेषण कहलाती है यह प्रबन्ध का उपभोक्ता एवं प्रबन्धक के मध्य अपनाया जाने वाला महत्वपूर्ण कार्य है ।

( 3 ) नवाचार – नवाचार से तात्पर्य नवीनतम कार्य करना व नवीन वस्तुओं का उत्पादन करना जिससे समय समय पर नवीनतम कार्य के माध्यम से नवीन वस्तुओं का उत्पादन किया जाय नवाचार कहलाता है नवाचार प्रबन्ध को लाभ प्राप्ति का महत्वपूर्ण कार्य है ।

प्रबन्ध के विषय मे यह जानकारी हमारे पास उपलब्ध नोट्स की सहायता से तैयार की गई है

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Special Thanks – Gagan Sharma

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